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 आकलन के ऐसे कौन-से प्रकार हैं जिन्हें आप बुनियादी अवस्था में बच्चों के साथ प्रयोग कर सकते हैं? आकलन के प्रकारों की सूची बनाएं - विशेष रूप से लिखित परीक्षा से भिन्न आकलन के प्रकार सोचें।

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  1. आकलन के ऐसे कौन-से प्रकार हैं जिन्‍हें आप बुनियादी अवस्था में बच्चों के साथ प्रयोग कर सकते हैं? आकलन के प्रकारों की सूची बनाएं - विशेष रूप से लिखित परीक्षा से भि‍न्न आकलन के प्रकार सोचें।

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  2. आकलन शिक्षण की सतत एवं समानान्तर प्रक्रिया है। जब भी कक्षा में कोई विषय वस्तु सिखाई जाए तो उसे बच्चे ने ग्रहण किया अथवा नहीं या कितना ग्रहण किया इसे तुरन्त ही जान लेना आवश्यक है । चूंकि छोटे बच्चे शिक्षण का थोड़ा थोड़ा भाग ही ले पाते हैं। अतः उस छोटे हिस्से को पुनः उससे पूछा जाए। कापी या बोर्ड पर लिखवा कर देखा जाए।एक बार नहीं बार बार इस प्रक्रिया को तब तक दोहराया जाए जब तक हम संतुष्ट न हो जाए । साथ में हर बार बच्चे को शाबास,गुड जैसे शब्दो से प्रोत्साहित भी करते जाए। फिर अगला भाग सिखाए उसे भी बार बार दोहराएं ।लौट के पहले वाली सीख को भी पूछें कि बच्चा भूला तो नहीं है। यहां आकलन की प्रक्रिया साथ साथ होती जाएगी।
    माना आज हम 4 अक्षर का ख ख ग सीखा रहे हैं । क अक्षर को पेंसिल से क ई बार हाथ पकड़कर फिर बच्चे द्वारा स्वयं बना कर साथ में बोलते ही जाए, अब उसे ये अक्षर याद हो जाए तब अगला अक्षर "ख" इसी तरह सीखाते। वापस "क" अक्षर का आकलन कर लें। "ख" का भी आकलन करने के बाद "ग" को सीखाए । बोलना लिखना आ जाए तो शाबाशी देकर आगे बढ़ें।"घ"अक्षर की ओर। शनै शनै आकलन भी होगा ।साथ में शिक्षण भी।

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  3. आकलन शिक्षण की सतत एवं समानान्तर प्रक्रिया है। जब भी कक्षा में कोई विषय-वस्तु सिखाई जाए तो उसे बच्चे ने ग्रहण किया अथवा नहीं या कितना ग्रहण किया इसे तुरन्त ही जान लेना आवश्यक है । चूंकि छोटे बच्चे शिक्षण का थोड़ा-थोड़ा भाग ही ले पाते हैं। अतः उस छोटे हिस्से को पुनः उससे पूछा जाए। कापी या बोर्ड पर लिखवा कर देखा जाए।एक बार नहीं बार- बार इस प्रक्रिया को तब तक दोहराया जाए, जब तक हम संतुष्ट न हो जाए । साथ में हर बार बच्चे को शाबाश, बहुत अच्छा शब्दों से प्रोत्साहित भी करते जाए। फिर अगला भाग सिखाए उसे भी बार बार दोहराएँ। लौट के पहले वाली सीख को भी पूछें कि बच्चा भूला तो नहीं है। यहाँ आकलन की प्रक्रिया साथ-साथ होती जाएगी।

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  4. observation and make the portfolio are the useful tools of asessment.

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  5. बच्चों का सतत मूल्यांकन बहुत जरूरी है ताकि उनके पूर्व ज्ञान का सही आकलन किया जा सके और निदानात्मक उपाय किया जा सके। बच्चों के व्यवहार, रुचि पर भी ध्यान देना चाहिए। बुनियादी संख्यात्मक समझ का मौखिक आकलन, जोर से पठन, सहपाठी के संग ग्रुप में पठन आदि प्रकारों से बच्चों का मूल्यांकन किया जा सकता है साथ ही निदानात्मक उपाय भी अपनाया जा सकतहै।

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  6. बच्चों का सतत मूल्यांकन बहुत जरूरी है ताकि उनके पूर्व ज्ञान का सही आकलन किया जा सके और निदानात्मक उपाय किया जा सके। बच्चों के व्यवहार, रुचि पर भी ध्यान देना चाहिए। बुनियादी संख्यात्मक समझ का मौखिक आकलन, जोर से पठन, सहपाठी के संग ग्रुप में पठन आदि प्रकारों से बच्चों का मूल्यांकन किया जा सकता है साथ ही निदानात्मक उपाय भी अपनाया जा सकतहै।

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