भाषा सीखाने की शुरुआत मातृभाषा मे आसपास की वस्तुओं से परिचय के साथ उनको भाषा मे बोलने के लिए प्रेरित करके करनी चाहिए| तत्पश्चात वर्णमाला के साथ ध्वन्यात्मक परिचय कराना चाहिए|
बच्चों को भाषा सिखाने की शुरुआत मौखिक रूप में उनसे सम्बन्धित बातों, वस्तुओं, आसपास के वातावरण-जैसे खिलौने, परिवार, मित्र आदि से करनी चाहिए। जब बच्चे इनमें रुचि लेने लगें और बातचीत का अर्थ ग्रहण करने में समर्थ हो जाए, तब ही हमें वर्णमाला सिखाना शुरू करना चाहिए। बच्चों को क्रमानुसार वर्णमाला सिखाने के स्थान पर समय तथा आवश्यकता के अनुसार वर्णो से परिचित करवाना चाहिए। जिससे वे उनका सही प्रयोग और शुद्ध लेखन कर सकें तथा सीखने में आनंद का अनुभव कर सकें।
भाषा सीखाने की शुरुआत मातृभाषा मे आसपास की वस्तुओं से परिचय के साथ उनको भाषा मे बोलने के लिए प्रेरित करके करनी चाहिए| तत्पश्चात वर्णमाला के साथ ध्वन्यात्मक परिचय कराना चाहिए|
Watch the video film “Khula Aakash” 2014 from the following link: https://www.youtube.com/watch?v=1XjDHOrcJyw and reflect on it. Think about what is ECCE? Why is it important? How does ECCE provide a basis for learning in school and life? Share your reflections.
How will you engage with different stakeholders to adapt to the learning needs of children of 3-9 years of age? Reflect on your role as a School Leader.
Based on your understanding of various assessment strategies for language, literacy and numeracy, list down the key practices you would like to take forward in your assessment practices with your children.
क्या हमें भाषा सिखाने की शुरुआत वर्णमाला सिखाने से करनी चाहिए?
ReplyDeleteभाषा सीखाने की शुरुआत मातृभाषा मे आसपास की वस्तुओं से परिचय के साथ उनको भाषा मे बोलने के लिए प्रेरित करके करनी चाहिए| तत्पश्चात वर्णमाला के साथ ध्वन्यात्मक परिचय कराना चाहिए|
Deleteha varnmaala se karni chahiy lekin we apni matrabhasha m sekhe to our bhi accha h
ReplyDeleteबच्चों को भाषा सिखाने की शुरुआत मौखिक रूप में उनसे सम्बन्धित बातों, वस्तुओं, आसपास के वातावरण-जैसे खिलौने, परिवार, मित्र आदि से करनी चाहिए। जब बच्चे इनमें रुचि लेने लगें और बातचीत का अर्थ ग्रहण करने में समर्थ हो जाए, तब ही हमें वर्णमाला सिखाना शुरू करना चाहिए।
ReplyDeleteबच्चों को क्रमानुसार वर्णमाला सिखाने के स्थान पर समय तथा आवश्यकता के अनुसार वर्णो से परिचित करवाना चाहिए। जिससे वे उनका सही प्रयोग और शुद्ध लेखन कर सकें तथा सीखने में आनंद का अनुभव कर सकें।
वर्णमाला सिखाने से पहले बच्चों को ऑब्जेक्ट्स और उनकी प्रारम्भिक ध्वनियों से परिचित कराना चाहिए। इसके पश्चात धीरे-धीरे वर्णमाला से परिचित कराना चाहिए।
ReplyDeleteno, first we should be provide picture-based books to increase intrest of students in reading, then we start introduce laters.
ReplyDeleteno, first we should introduce child some picture-based books, then we can start letters.
ReplyDeleteबच्चों में मातृ भाषा का प्रयोग करते हुए अपने आस पास के वस्तुओं से परिचय कराते हुए विद्यालय की भाषा की ओर लेजाना चाहिए।
ReplyDeleteभाषा सीखाने की शुरुआत मातृभाषा मे आसपास की वस्तुओं से परिचय के साथ उनको भाषा मे बोलने के लिए प्रेरित करके करनी चाहिए| तत्पश्चात वर्णमाला के साथ ध्वन्यात्मक परिचय कराना चाहिए|
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