हाँ , बच्चों में भाषा सीखने और भाषा के माध्यम से सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है ।जब बच्चे विद्यालय आते हैं तो वे अपनी मातृभाषा के साथ आते हैं उनमें अन्य भाषा सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है वे स्वयं करके सीखते हैं उस समय हमें उनकी पहली भाषा से दूसरी भाषा में समझाने में सहयोग करना चाहिए।
एक सीमा तक यह बात ठीक है कि बच्चों में भाषा सीखने और भाषा के माध्यम से सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। किंतु भाषा सीखने के लिए हमेशा किसी मॉडल की आवश्यकता नहीं है। वर्तमान समय तथा विकास की दृष्टि से आधुनिक भाषा आवश्यक है।
बच्चे अपनी मातृ भाषा में बेहतर तरीके से सोच, समझ और अभिव्यक्त कर सकते हैं। इसलिए उचित यहीं होगा की बच्चो को मातृभाषा से विद्यालय के भाषावजी और ले जाना चाहिए ताकि बच्चे आसानी से LSRW कौशल विकसित कर सकें।
हाँ , बच्चों में भाषा सीखने और भाषा के माध्यम से सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है ।जब बच्चे विद्यालय आते हैं तो वे अपनी मातृभाषा के साथ आते हैं उनमें अन्य भाषा सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है वे स्वयं करके सीखते हैं उस समय हमें उनकी पहली भाषा से दूसरी भाषा में समझाने में सहयोग करना चाहिए।
Pratek bachche ki apni matrabhasha hoti hai jiske dwara we aasni se class me sikhte hain. Anya bhasha ko sikhne ke liye iska prayog aniwarya hota hai..
Watch the video film “Khula Aakash” 2014 from the following link: https://www.youtube.com/watch?v=1XjDHOrcJyw and reflect on it. Think about what is ECCE? Why is it important? How does ECCE provide a basis for learning in school and life? Share your reflections.
How will you engage with different stakeholders to adapt to the learning needs of children of 3-9 years of age? Reflect on your role as a School Leader.
Based on your understanding of various assessment strategies for language, literacy and numeracy, list down the key practices you would like to take forward in your assessment practices with your children.
क्या हम जानते हैं कि बच्चों में भाषा सीखने और भाषा के माध्यम से सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है?
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Deleteहाँ, बच्चे भाषा स्वाभाविक रूप से भाषा सीखते है, किन्तु प्रारम्भिक अवस्था मे मातृभाषा सीखने की प्रक्रिया मे अधिक कारगर होती है|
Deleteआधुनिक समय व विकास की दृष्टि से आधुनिक भाषा ज्ञान आवश्यक है।
ReplyDeleteकुछ सीमा तक यह ठीक है किंतु भाषा सीखने के लिए किसी मॉडल की हमेशा आवश्यकता नहीं है
ReplyDeleteहाँ , बच्चों में भाषा सीखने और भाषा के माध्यम से सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है ।जब बच्चे विद्यालय आते हैं तो वे अपनी मातृभाषा के साथ आते हैं उनमें अन्य भाषा सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है वे स्वयं करके सीखते हैं उस समय हमें उनकी पहली भाषा से दूसरी भाषा में समझाने में सहयोग करना चाहिए।
Deleteएक सीमा तक यह बात ठीक है कि बच्चों में भाषा सीखने और भाषा के माध्यम से सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है। किंतु भाषा सीखने के लिए हमेशा किसी मॉडल की आवश्यकता नहीं है।
ReplyDeleteवर्तमान समय तथा विकास की दृष्टि से आधुनिक भाषा आवश्यक है।
बच्चे अपनी मातृ भाषा में बेहतर तरीके से सोच, समझ और अभिव्यक्त कर सकते हैं। इसलिए उचित यहीं होगा की बच्चो को मातृभाषा से विद्यालय के भाषावजी और ले जाना चाहिए ताकि बच्चे आसानी से LSRW कौशल विकसित कर सकें।
ReplyDeleteहाँ , बच्चों में भाषा सीखने और भाषा के माध्यम से सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है ।जब बच्चे विद्यालय आते हैं तो वे अपनी मातृभाषा के साथ आते हैं उनमें अन्य भाषा सीखने की स्वाभाविक प्रवृत्ति होती है वे स्वयं करके सीखते हैं उस समय हमें उनकी पहली भाषा से दूसरी भाषा में समझाने में सहयोग करना चाहिए।
ReplyDeleteYes
ReplyDeleteबच्चे अपनी मातृ भाषा में बेहतर तरीके से सोच, समझ कर अभिव्यक्त कर सकते हैं। ताकि बच्चे आसानी से LSRW कौशल विकसित कर सकें।
ReplyDeleteyes we know
ReplyDeleteyes, we know.
ReplyDeleteyes, we know it. every child has some knowledge of language by birth.
ReplyDeleteYES WE KNOW, every child has some knowledge of language by its childhood or by birth.
ReplyDeletePratek bachche ki apni matrabhasha hoti hai jiske dwara we aasni se class me sikhte hain. Anya bhasha ko sikhne ke liye iska prayog aniwarya hota hai..
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